Detergent Powder Manufacturing

Detergent Powder Manufacturing | Small Business Idea

इस लेख में निम्नलिखित सभी सवालो के जवाब मिल जायेंगे |

How we can make detergent powder
What is the main ingredient in washing powder?
डिटर्जेन्ट पाउडर Detergent Powder Making Formula, Machine & Raw Material
डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने का व्यवसाय Detergent Powder Making Business

·         दोस्तों, इस लेख के माध्यम से आज आप सभी लोगों को डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने के व्यवसाय के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे जैसे कि
·         DETERGENT Powder का कैसे निर्माण किया जाता है
·         DETERGENT Powder बनाने के लिये कच्चे माल अर्थात् रा मैटेरियल कहाँ से, किस प्रकार और कैसे पाया जा सकता है
·         डिटर्जेन्ट निर्माण में कौन-कौन सी आवश्यक सामग्री एवं मशीनरी इस्तेमाल में लायी जाती है
·         बने हुए डिटर्जेन्ट की पैकिंग किस प्रकार की जाती है और इस व्यवसाय को प्रारम्भ करने के लिये कौन- कौन सी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। 


डिटर्जेन्ट पाउडर की उपयोगिता Importance In India

हमारे देश में DETERGENT Powder की उपयोगिता किसी से छिपी नही है। यह व्यक्ति के रोजमर्रा की जिन्दगी का एक अभिन्न हिस्सा है जिसके बगैर किसी भी परिवार या व्यक्ति का काम चलना बड़ा ही मुश्किल है। DETERGENT Powder बनाने का कारोबार सभी प्रकार से लाभदायक ही होता है क्योंकि डिटर्जेन्ट पाउडर एक ऐसी घरेलू वस्तु है जो प्रत्येक घर में हर दिन कपड़े साफ करने, बर्तन में लगे दाग धब्बों को साफ करने में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने के लिये कच्चा माल - Detergent Powder Making Raw Material
·         स्लरी                                     
·         एओएस
डीकोल                                   
·         सीबीएक्स
साल्ट                                 
·         सोडा एस
·         डोलोमाईट                           
·         2 किलो कलर साल्ट

Detergent Powder Making Raw Material & Machinery
·         स्क्रीमिंग मशीन                   
·         पैकिंग मशीन
मिक्सिंग मशीन


डिटर्जेन्ट निर्माण हेतु कच्चा माल केसे प्राप्त करें - Raw Material
DETERGENT Powder निर्माण हेतु कच्चे माल की प्राप्ति स्थानीय बाजारों में की जा सकती है अथवा इन्टरनेट पर गूगल में सर्च करके इन सभी कच्चे मालों की खरीददारी इनके निर्माण करने वाली कम्पनियों के द्वारा आनलाईन माध्यम से उचित दर पर बड़ी आसानी से किया जा सकता है।

डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने के लिये आवश्यक कानूनी प्रक्रिया - Registration For Detergent Making Plant
दोस्तो, किसी भी व्यवसाय की शुरुआत करने से पहले उस व्यवसाय से सम्बन्धित सभी कानूनी प्रक्रियाओं को समझना बहुत जरूरी हे ताकि बाद में किसी प्रकार की कोई समस्य़ा न उत्पन्न हो। इसके लिये आवश्यक है कि इस व्यवसाय को शुरुआत करने से पहले आप सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर लें जो निचे लिखी गई हे ।
सबसे पहले आप अपने व्यवसाय का udhyog Aadhar में पंजीकरण करवा लें। यह पंजीकरण आनलाईन किसी भी स्थान से किसी भी समय कराया जा सकता है और यह पूर्णतः निःशुल्क होता है। इसके साथ ही साथ GST में भी Registration करवा लें ताकि TAX सम्बन्धी सभी समस्याओं से बचा जा सके, और क्रय विक्रय के लिए अपने व्यवसाय की पक्की रसीद छपवाना न भूलें।


डिटर्जेन्ट निर्माण की विधि एवं प्रक्रिया Detergent Powder Making Process

डिटर्जेन्ट निर्माण की प्रक्रिया के अन्तर्गत सबसे पहले स्लरी को एक चौडे मुँह वाली प्लास्टिक की बाल्टी में दाल लो और फिर उचित मात्रा में उसमें SOS, डीकोल, सीबीएक्स एक के बाद एक करके डालते जाते हे |डीकोल इसलिये डाला जाता है क्योंकि डिटर्जेन्ट पाउडर के अन्दर अनेक प्रकार की त्वचा को जलाने व झुलसाने वाले तत्व मौजूद होते हैं। इस डीकोल की मदद से उन सभी हानिकारक तत्वों से हाथों एवं त्वचा की सुरक्षा की जा सकती हे।
अब हाथो में दस्ताने पहन कर सभी को एक साथ किसी लकड़ी या प्लास्टिक के डण्डे से भली प्रकार मिला दिया जाता |इसके बाद मिक्सर के पास जाते हैं। यह एक आटोमेटिक मशीन है , इस मशीन में लगभग 55 किलो डिटर्जेन्ट पाउडर तैयार करने के लिये हम लगभग 35 KG नमक डालते हैं और पाँच किलो SOAD ASH डालते हैं और फिर इसी में लगभग 5 KG डोलोमाइट डाल देते हैं |
डिटर्जेन्ट पाउडर को कई रंगों का बनाने के लिए बनाने के लिये लगभग २ kg कलर साल्ट भी मिला दिया जाता है और सभी चींजे डालने के बाद इस मशीन को थोड़ा सा चला दिया जाता है। इसके बाद पहले बनांये हुए स्लरी, एओएस, डीकोल, सीबीएक्स आदि के बने हुए घोल को इस मिक्सर मशीन में बड़ी सावधानी से डाल दिया जाता है और फिर मशीन को चालू करके डिटर्जेन्ट पाउडर बनाने की प्रक्रिया प्रारंभकर दी जाती है।
इस प्रक्रिया से पहले मुँह तथा नाक पर कोई साफ कपड़ा या पर्यावरण मास्क लगा लें जिससे डिटर्जेन्ट से निकलने वाली तेज गन्ध और उसके सूक्ष्म कण नाक या मुँह में न घुसें।
कुछ देर तक मिश्रण को दोनों तरफ घुमाने के बाद आपका डिटर्जेन्ट पाउडर बनकर तैयार है अब  तैयार डिटर्जेन्ट पाउडर को आवश्यकता अनुसार पैकेटों में भरकर के पैकिंग मशीन की सहायता से पैक कर देते हैं।

agarbatti-business-information-hindi


Incense Stick अगरबत्ती Making Process, Machine & Raw Material

अगरबत्ती बनाने का बिजनेस Incense Stick Making Machine & Raw Material

सबसे पहले जानते है की अगरबत्ती का इस्तेमाल कहाँ – कहाँ होता है |



अगरबत्ती एक ऐसी वस्तु है जो हर घर में, हर धर्म में इस्तेमाल होती है........

·         धार्मिक स्थान पर
·         घर में धार्मिक अनुष्ठान में
·         किसी भी प्रकार के पूजा पाठ में
·         मच्छरों को भगाने में
·         दुर्गन्ध को समाप्त करने में






अगरबत्ती बनाने के लिये कच्चा मालः- Raw Material

अब आपके मन में कुछ सवाल होंगे जैसे कि .....................

·         अगरबत्ती के बिजनेस को कैसे प्रारम्भ करें
·         इसके लिये कच्चा माल कहाँ से मगाँये
·         इस बिजनेस को करने में कितना पैसा लगेगा
·         इसे करने में कितने आदमी की आवश्यकता पड़ेगी
·         यह बाजार में कैसे बिकेगा और कितना मुनाफा होगा


इस बारे में सम्पूर्ण जानकारी के लिये rojgaarduniya.com के इस लेख को पूरा पढ़ें |

अगरबत्ती बनाने के लिए हमें जिस कच्चे माल  की आवश्यकता पड़ती है उसे agarbatti premix के नाम से जानते हैं। यह जो agarbatti premix है असल में यह कई चीजों माँ मिश्रण होता हे जिसमे चारकोल पाउडर, लकड़ी का पाउडर, गुड़ पाउडर मिला होता है,  यह पाउडर हमें बाजार में आसानी मिल जाता है। निचे दिए लिंक पर क्लिक कर के आप इसको खरीद सकते है |




इसके अतिरिक्त कुछ सामान की आवश्कता होती है जैसे 

·         अगर की लकड़ी (छड़ी)
·         खुशबूदार परफ्यूम
·         डी00पी0 लिक्विड
·         पाउडर को गूथने के लिए परात या कोई टब
·         पैकिंग के लिये पालीथीन

अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चे माल को तैयार करने की विधि-



एक किलो कच्चा माल तैयार करने की प्रक्रिया 

1 किलोग्राम Premix पाउडर में लगभग 650 ग्राम पानी मिला लें और  पानी मिलाने के बाद पाउडर और पानी को मिलाने के बाद इसको गूथ कर आटे की तरह बना लेना है |इसके बाद हम इसे सीधे मशीन में रख कर अगरबत्ती बनाना सुरु कर देंगे |

Phenyl-making-Business-Process

फिनायल बनाने का उद्योग/व्यवसाय Phenyl making Business, Process, business, Raw Material Information

फिनायल बनाने का व्यवसायः Phenyl making business

फिनायल बनाने का व्यवसाय काफी कम पैसो के साथ सुरु किया जा सकता है। फिनायल को आप अपने घर पर स्वयं तैयार कर सकते है। फिनायल की आवश्यकता लगभग हर घर में रोज पड़ती है और घर ही क्यों इसकी आवश्यकता हर प्रांगन में है चाहे वह घर हो ऑफिस इसी कारण फिनायल की मांग हमेशा ही बनी रहती है, इसका मतलब इस उत्पाद को आसानी से बेचा जा सकता है।



आइये अब जानते हैं कि फिनायल की आवश्यकता आखिर कहाँ-कहाँ है?

1-    घरेलू इस्तेमाल मे
2-    चिकित्सा के क्षेत्र मे
3-    पशु चिकित्सा के क्षेत्र मे
4-    सरकारी व गैर सरकारी स्कूल कालेजों के प्रयोगशाला मे
5-    गाँव, देहात, शहर, एवं नगरों में कीटनाशक के रुप मे

Homeopathy Remedies in Hindi

homeopathyhub.com एक hindi वेबसाइट है जिसमे रोगों का होमियोपैथी और आयुर्वैदिक  इलाज़ दिया गया है और इसकी मदद से आप अपना इलाज़ स्वयं कर सकते है |
अपने रोगों के जिम्मेदार हम स्वयं है तो इलाज़ भी स्वयं ही करना होगा आइये अपनी चिकित्सा स्वयं करे क्योंकि लगभग 85% बिमारियों का इलाज़ तो स्वयं घर पर ही किया जा सकता है केवल 15% मामलो में ही  हमें किसी चिकित्सक की आवश्कता होगी |

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mushroom cultivation hindi


भारत जापान चीन  जैसे देशो में  आबादी अधिक हे और शाकाहारी भी है मशरूम जैसे भोजन का महत्‍व पोषण के हिसाब से से बहुत अधिक हो जाता है । हमारे यहाँ मशरूम का प्रयोग सब्‍जी के रूप में किया जाता है। यह विधि मेने भारत की मशरूम गर्ल दिव्या रावत जिन्हे उत्तराखंड के मशरूम अम्बेस्डर भी बनाया गया हे से प्रेरित हो कर बनाई हे |दिव्या जी ने मशरूम के क्षेत्र में बहुत ही उल्लेकनिये काम किया हे वो आज देहरादून में अपना ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान चलती हे जहाँ वो बहुत लोगो को ट्रेनिंग भी देती हे |

भारत में मशरूम उत्पादक दो समुह में है एक जो केवल निश्चित मौसम में ही मशरूम खेती करते हैं तथा दूसरे वो हे जो पुरे साल ही  साल मशरूम की खेती करते है |मौसमी खेती प्रमुखत्या हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कशमीर, उत्‍तर प्रदेश उत्तराखंड । पूरे साल मशरूम की खेती इसके अलावा पुरे देश में की जाती है। देहरादून ,ऊटी गुडगाँव, पौंआ आदि जगह में देश में सबसे बड़ी इकाइयां लगी हुई हे  जहा प्रति वर्ष 5000 तन तक मशरूम पैदा होता है |

मशरूम की भारत में मुख्यत्या तीन  प्रजाति उगाई जाती है
(1) बटन (Button)
(2) ढींगरी (Oyster)
(3)धानपुआल या पैडीस्‍ट्रा (Paddy straw)

इन तीनो में बटन मशरूम सबसे अधिक खाया जाता है। तीनो टाइप की मशरूम की खेती  को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से किया जा सकता है |

Best time for  mushroom Sowing  in India
जाने भारत देश में  बटन टाइप मशरूम उगाने का सबसे सही समय।

भारत में बटन मशरूम उगाने का सबसे सही समय OCTOBER से MARCH के महीने होते है |Button खुम्‍बी  के लिए सुरुवात के दिन से ही 22 - 26 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान  की जरूरत  होती है क्योंकि इसी तापमान में कवक का जाल सबसे तीव्र  गति से बढता है। इसके बाद में 14 - 18 डिग्री ताप ही अच्छा रहता है ।

मशरूम के लिए कम्‍पोस्‍ट खाद को तैयार करना  | साधारण विधि से Compost को बनाने में बीस से पच्चीस दिन का टाइम लगता है |


बटन मशरूम के लिए एक विशेष प्रकार के खाद की जरूरत होती हे | कम्‍पोस्‍ट को   Pasturization अथवा निर्जीवीकरण से बनाया जाता है। निचे में इसकी विधि लिख रहा हूँ अगर आप इसको सही सही कर लेते हे तो आप खुद ही अच्छी खाद तैयार कर लेंगे |

भूसे से मशरूम की  COMPOST तैयार करना |

सामग्री (Composition)




100 सेंमी लम्बी, 50 सेंमी चौडी तथा 15 सेंमी ऊची 15 पेटियों के लिए इस विधि से कम्पेस्ट बनाने के लिए सामग्री:
 भूसा - लगभग 250 किलोग्राम
 बारीक कटी भूसी - 20-25 किलोग्राम
 कैल्शियम अमोनियम नाईट्रेट या अमोनियम सल्फेट   - लगभग 4 किलोग्राम
 यूरिया खाद वाला  - 3 किलोग्राम
 जिप्सम - 20 किलोग्राम


साफ़ सुथरे स्थान पर कम्पोस्ट तैयार करनी है | वहां पर भूसे की लगभग १० इंच मोटी लेयर बिछाकर उस पर साफ़ पानी का छिड़काव कर के अच्छी तरह से भिगो दें। भीगोने के लगभग 18  घंटे बाद दूसरा चरण सुरु होगा जिसमे उसमें जिप्सम तथा कीटनाशक को छोडकर बची हुई साड़ी चीजे  बहुत अच्छी तरह से मिला देंगे । फिर उस बने मिश्रण को एकसार ढेर में इकठ्ठा कर लेंगे |अब इस बने एकसार ढेर को हर तीसरे  दिन हवा लगाने के लिए साफ़ फर्श बर्रेक बिछा दें और आधा घंटे के बाद वापस उसी सामान आकार का ढेर में लगा  दें। अगर आपको लगे की  भूसा सूख गया है तो उस पर थोड़ा सा  पानी छिडककर दोबारा  गीला कर लें।

अब जब आप मिश्रण को तीसरी बार पलटें तो उसमे कुल  जिप्सम की आधी मात्रा मिला दें और बचे आधे जिप्सम को चौथी बार पलटने पर मिलाना है |5वीं पल्टन के समय 10 ML  मैलाथियान को लगभग 5 लीटर साफ़-पनी में मिला कर  भूसे पर एक सार छिड़क दें और सारे मिश्रण को अच्छे से  मिलाकर फिर से सामान आकर का ढेर बना लें । अब ४ दिनों में आपका खाद भरने के लिए तैयार हो जायेगा |

NOTE - मशरुम उत्पादन की ट्रेनिंग की किताब यहाँ से खरीदें |

अब तैयार कम्पोस्ट को साफ़ जगह पर पर बिछा दें और  एक क्विंटल कम्पोस्ट में 700 gram  से 1 kilo स्पान-बीज   अच्छी तरह से मिलाया जाता है।बीज की बाजार में कीमत लगभग २००-३००  रुपए के आस-पास होगी। बिजाई की गई कम्पोस्ट को  पॉलीथिन बैग में हल्का दबा-दबा  के भरलें  हर  बैग में दस  से पंद्रह किलो एक बैग में कम्पोस्ट भरें। अब दिन में दो बार पानी का हल्का छिड़काव करना हे |
लगभग ६-७ दिन बाद धागे की तरह का फफूंद दिखने लगेगा जो अगले ५ दिनों में पुरे कम्पोस्ट को सफ़ेद कर देगा अब इस फफूंद को हमें एक मिटटी खाद से ढकना हे |

आवरण मिटटी बनाने की विधि

लगभग २ साल पुराणी गोबर की काली खाद में किसी बाग़-बगीचे की मिटटी को तीन अनुपात एक के अनुपात में मिलाना हे। अब इसमें  ४% फर्मलीन का घोल  मिला  कर अच्छी तरह से मिला ले ।  अब इसे तीन से चार दिन तक तब तक उलटते पलटते रहे जब ताम इसमें फार्मलीन की गंध समाप्त न हो जाये। इसका  PH ७.5 होना चाहिए।  इसके बाद इसकी 4 CM मोटी सतह  कम्पोस्ट की थैलियों पर  बिछा दें |

अब इसे  बिछाने के बाद 2 % फर्मलीन के घोल का छिड़काव करना हे। और इसके बाद  एक या दो बार पानी  का छिड़काव जरूर करें। अब 15 से 18 दिन बाद मशरूम  निकलना चालू हो जाता है और अगले १५ दिनों तक निकलता रहता हे । तैयार मशरुम  को   दिन में   दो बार  हलके से अंगुलिओं के सहारे घुमा  कर  तोडना चाहिए। मशरूम बहुत नाजुक होती है और फ्रिज में इनका स्टोरेज  केवल 2-3 दिनों के लिए ही किया जा सकता है।

तोड़ने के बाद पैकिंग जल्दी ही कर ले और पैकिंग करते समय नहीं न रहे साथ ही ऐसे माध्यम में पैकिंग करे ताकि भेजते समय दबाव न पड़े |

अधिक जानकारी के लिए निचे दी गई वीडियो देख सकते है |



नोट : यह विधि विशेषज्ञ की देख रेख में लिखी गई हे फिर भी एक बार ट्रेनिंग जरूर ले लेनी चाइये |

Whare to Buy Mushroom Spawn in India - आप मशरूम का बीज निचे दिए गए स्थानों से खरीद सकते हे 

Facebook link of  Mushroom Girl For Training: https://www.facebook.com/Soumya-Foods... 

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(1)   Address: G.B. Pant University of Agriculture & Technology,, Pantnagar, Uttarakhand 263145
Phone: 05944 234 564
(2)   Directorate of Mushroom Research
(Indian Council for Agricultural Research)
Chambagaht, Solan – (HP) 173213 India
Dr. Mahantesh Shirur, Scientist (Extension)
Phone : 91-1792-230767,230541 (Ext. 236)

(3)    G.B. Pant University of Agriculture & Technology, Pantnagar – 263 145.

Ram Nath Kovind

राम नाथ कोविन्द - Ram Nath Kovind


श्री राम नाथ कोविन्द (Ram Nath Kovind) (Born  : 1 October 1945)  भारत के 14 वें राष्ट्रपति है श्री राम नाथ कोविन्द राज्यसभा सदस्य एवं बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं। बीजेपी एवं  एन डी ए के द्वारा जून 19  2017 के दिन श्री राम नाथ कोविन्द भारत के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित किये गए।

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क्या आपका ब्लॉग भी होम पेज पर  केवल दो या तीन पोस्ट ही दिखा रहा हे |निचे दिए सोलूशन्स को पढ़े और अपनी पोस्ट में इसे कर के देखने यक़ीनन ही आपकी समस्या सुलझ जाएगी |

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