mushroom cultivation hindi


भारत जापान चीन  जैसे देशो में  आबादी अधिक हे और शाकाहारी भी है मशरूम जैसे भोजन का महत्‍व पोषण के हिसाब से से बहुत अधिक हो जाता है । हमारे यहाँ मशरूम का प्रयोग सब्‍जी के रूप में किया जाता है। यह विधि मेने भारत की मशरूम गर्ल दिव्या रावत जिन्हे उत्तराखंड के मशरूम अम्बेस्डर भी बनाया गया हे से प्रेरित हो कर बनाई हे |दिव्या जी ने मशरूम के क्षेत्र में बहुत ही उल्लेकनिये काम किया हे वो आज देहरादून में अपना ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान चलती हे जहाँ वो बहुत लोगो को ट्रेनिंग भी देती हे |

भारत में मशरूम उत्पादक दो समुह में है एक जो केवल निश्चित मौसम में ही मशरूम खेती करते हैं तथा दूसरे वो हे जो पुरे साल ही  साल मशरूम की खेती करते है |मौसमी खेती प्रमुखत्या हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू-कशमीर, उत्‍तर प्रदेश उत्तराखंड । पूरे साल मशरूम की खेती इसके अलावा पुरे देश में की जाती है। देहरादून ,ऊटी गुडगाँव, पौंआ आदि जगह में देश में सबसे बड़ी इकाइयां लगी हुई हे  जहा प्रति वर्ष 5000 तन तक मशरूम पैदा होता है |

मशरूम की भारत में मुख्यत्या तीन  प्रजाति उगाई जाती है
(1) बटन (Button)
(2) ढींगरी (Oyster)
(3)धानपुआल या पैडीस्‍ट्रा (Paddy straw)

इन तीनो में बटन मशरूम सबसे अधिक खाया जाता है। तीनो टाइप की मशरूम की खेती  को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से किया जा सकता है |

Best time for  mushroom Sowing  in India
जाने भारत देश में  बटन टाइप मशरूम उगाने का सबसे सही समय।

भारत में बटन मशरूम उगाने का सबसे सही समय OCTOBER से MARCH के महीने होते है |Button खुम्‍बी  के लिए सुरुवात के दिन से ही 22 - 26 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान  की जरूरत  होती है क्योंकि इसी तापमान में कवक का जाल सबसे तीव्र  गति से बढता है। इसके बाद में 14 - 18 डिग्री ताप ही अच्छा रहता है ।

मशरूम के लिए कम्‍पोस्‍ट खाद को तैयार करना  | साधारण विधि से Compost को बनाने में बीस से पच्चीस दिन का टाइम लगता है |


बटन मशरूम के लिए एक विशेष प्रकार के खाद की जरूरत होती हे | कम्‍पोस्‍ट को   Pasturization अथवा निर्जीवीकरण से बनाया जाता है। निचे में इसकी विधि लिख रहा हूँ अगर आप इसको सही सही कर लेते हे तो आप खुद ही अच्छी खाद तैयार कर लेंगे |

भूसे से मशरूम की  COMPOST तैयार करना |

सामग्री (Composition)




100 सेंमी लम्बी, 50 सेंमी चौडी तथा 15 सेंमी ऊची 15 पेटियों के लिए इस विधि से कम्पेस्ट बनाने के लिए सामग्री:
 भूसा - लगभग 250 किलोग्राम
 बारीक कटी भूसी - 20-25 किलोग्राम
 कैल्शियम अमोनियम नाईट्रेट या अमोनियम सल्फेट   - लगभग 4 किलोग्राम
 यूरिया खाद वाला  - 3 किलोग्राम
 जिप्सम - 20 किलोग्राम


साफ़ सुथरे स्थान पर कम्पोस्ट तैयार करनी है | वहां पर भूसे की लगभग १० इंच मोटी लेयर बिछाकर उस पर साफ़ पानी का छिड़काव कर के अच्छी तरह से भिगो दें। भीगोने के लगभग 18  घंटे बाद दूसरा चरण सुरु होगा जिसमे उसमें जिप्सम तथा कीटनाशक को छोडकर बची हुई साड़ी चीजे  बहुत अच्छी तरह से मिला देंगे । फिर उस बने मिश्रण को एकसार ढेर में इकठ्ठा कर लेंगे |अब इस बने एकसार ढेर को हर तीसरे  दिन हवा लगाने के लिए साफ़ फर्श बर्रेक बिछा दें और आधा घंटे के बाद वापस उसी सामान आकार का ढेर में लगा  दें। अगर आपको लगे की  भूसा सूख गया है तो उस पर थोड़ा सा  पानी छिडककर दोबारा  गीला कर लें।

अब जब आप मिश्रण को तीसरी बार पलटें तो उसमे कुल  जिप्सम की आधी मात्रा मिला दें और बचे आधे जिप्सम को चौथी बार पलटने पर मिलाना है |5वीं पल्टन के समय 10 ML  मैलाथियान को लगभग 5 लीटर साफ़-पनी में मिला कर  भूसे पर एक सार छिड़क दें और सारे मिश्रण को अच्छे से  मिलाकर फिर से सामान आकर का ढेर बना लें । अब ४ दिनों में आपका खाद भरने के लिए तैयार हो जायेगा |

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अब तैयार कम्पोस्ट को साफ़ जगह पर पर बिछा दें और  एक क्विंटल कम्पोस्ट में 700 gram  से 1 kilo स्पान-बीज   अच्छी तरह से मिलाया जाता है।बीज की बाजार में कीमत लगभग २००-३००  रुपए के आस-पास होगी। बिजाई की गई कम्पोस्ट को  पॉलीथिन बैग में हल्का दबा-दबा  के भरलें  हर  बैग में दस  से पंद्रह किलो एक बैग में कम्पोस्ट भरें। अब दिन में दो बार पानी का हल्का छिड़काव करना हे |
लगभग ६-७ दिन बाद धागे की तरह का फफूंद दिखने लगेगा जो अगले ५ दिनों में पुरे कम्पोस्ट को सफ़ेद कर देगा अब इस फफूंद को हमें एक मिटटी खाद से ढकना हे |

आवरण मिटटी बनाने की विधि

लगभग २ साल पुराणी गोबर की काली खाद में किसी बाग़-बगीचे की मिटटी को तीन अनुपात एक के अनुपात में मिलाना हे। अब इसमें  ४% फर्मलीन का घोल  मिला  कर अच्छी तरह से मिला ले ।  अब इसे तीन से चार दिन तक तब तक उलटते पलटते रहे जब ताम इसमें फार्मलीन की गंध समाप्त न हो जाये। इसका  PH ७.5 होना चाहिए।  इसके बाद इसकी 4 CM मोटी सतह  कम्पोस्ट की थैलियों पर  बिछा दें |

अब इसे  बिछाने के बाद 2 % फर्मलीन के घोल का छिड़काव करना हे। और इसके बाद  एक या दो बार पानी  का छिड़काव जरूर करें। अब 15 से 18 दिन बाद मशरूम  निकलना चालू हो जाता है और अगले १५ दिनों तक निकलता रहता हे । तैयार मशरुम  को   दिन में   दो बार  हलके से अंगुलिओं के सहारे घुमा  कर  तोडना चाहिए। मशरूम बहुत नाजुक होती है और फ्रिज में इनका स्टोरेज  केवल 2-3 दिनों के लिए ही किया जा सकता है।

तोड़ने के बाद पैकिंग जल्दी ही कर ले और पैकिंग करते समय नहीं न रहे साथ ही ऐसे माध्यम में पैकिंग करे ताकि भेजते समय दबाव न पड़े |

अधिक जानकारी के लिए निचे दी गई वीडियो देख सकते है |



नोट : यह विधि विशेषज्ञ की देख रेख में लिखी गई हे फिर भी एक बार ट्रेनिंग जरूर ले लेनी चाइये |

Whare to Buy Mushroom Spawn in India - आप मशरूम का बीज निचे दिए गए स्थानों से खरीद सकते हे 

Facebook link of  Mushroom Girl For Training: https://www.facebook.com/Soumya-Foods... 

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(1)   Address: G.B. Pant University of Agriculture & Technology,, Pantnagar, Uttarakhand 263145
Phone: 05944 234 564
(2)   Directorate of Mushroom Research
(Indian Council for Agricultural Research)
Chambagaht, Solan – (HP) 173213 India
Dr. Mahantesh Shirur, Scientist (Extension)
Phone : 91-1792-230767,230541 (Ext. 236)

(3)    G.B. Pant University of Agriculture & Technology, Pantnagar – 263 145.
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